सईद बुधवार को दिल्ली पहुंचे हैं और उनके आने के बाद से ही प्रधानमंत्री के साथ उनकी मुलाक़ात की संभावनाएं जताई जा रही हैं.
पीडीपी का कहना है कि सैनिकों की संख्या में कटौती के मुद्दे पर वो केंद्र की बातों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं.
पीडीपी
नेता सईद का कहना था कि वो सैनिकों की कमी के लिए गर्मियों तक इंतज़ार
नहीं कर सकते और न ही केंद्र के दिखावे वाले रवैये से संतुष्ट होंगे.
इस
मुद्दे पर कांग्रेस के साथ मतभेदों को अत्यंत गंभीर करार देते हुए सईद ने
कहा कि वो इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस रुख से भी सहमत
नहीं है कि सैनिकों की कटौती पर गर्मियों में विचार होना चाहिए.
पीडीपी
और कांग्रेस मिलकर जम्मू कश्मीर में सरकार चला रही है और व्यवस्था के तहत
इस समय कांग्रेस के मुख्यमंत्री सत्तारुढ है लेकिन पिछले कुछ दिनों से
पीडीपी ने सैनिकों की कटौती को बड़ा मुद्दा बना लिया है.
इस मुद्दे पर विरोध दर्शाते हुए पीडीपी ने कैबिनेट की बैठकों का भी बहिष्कार कर रखा है.
यह
पूछे जाने पर कि क्या माना जाए कि गठबंधन टूटने के कगार पर है तो सईद का
कहना था कि वो अपने पत्ते नहीं खोलना चाहते बल्कि वो चाहते हैं कि केंद्र
इस मुद्दे पर कुछ करे.
जम्मू कश्मीर में हाल में
फ़र्ज़ी मुठभेड़ों की कई घटनाओं के सामने आने के बाद सैनिकों की छवि ख़राब
हुई है जिसके बाद पीडीपी ने सैनिकों की संख्या में कटौती को मुद्दा बना
लिया है.
केंद्र सरकार ने सैनिकों की संख्या
में कटौती के मुद्दे पर एक विशेष समिति बनाने का प्रस्ताव रखा है लेकिन
किसी भी इलाक़े से पूर्ण रुप से सैनिकों की वापसी की केंद्र की कोई योजना
फ़िलहाल नहीं दिख रही है.
ऐसे में पीडीपी प्रमुख और प्रधानमंत्री की मुलाक़ात में क्या होता है इसका प्रभाव जम्मू कश्मीर की राजनीति पर ज़रुर पड़ेगा.