उन्होंने कहा है कि इराक़ में स्थिरता को सुन्नियों की तुलना में अमरीका से ज़्यादा ख़तरा है.
इराक़ी
शहर नजफ़ में निकाली जाने वाली यह रैली बग़दाद पर अमरीकी नेतृत्व वाली
फ़ौजों के कब्ज़े के चार बरस पूरे होने पर की जा रही है.
इस अवसर पर संभावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए बग़दाद में कर्फ़्यू लगाने की घोषणा कर दी गई है.
सद्दाम की सत्ता का पतन
चार
बरस पहले अमरीका के नेतृत्व वाली फ़ौजों ने बग़दाद में घुसकर प्रतीक के
रुप में चौराहे पर लगी सद्दाम हुसैन की प्रतिमा को गिरा दिया था.
इसे इराक़ में सद्दाम हुसैन के सत्ता पलट के रुप में देखा गया था.
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सद्दाम हुसैन की मूर्ति का गिरना सत्ता परिवर्तन के प्रतीक के रुप में दिखाया गया था |
बीबीसी
के विश्व मामलों के संवाददाता जोनाथन चार्ल्स का कहना है कि सोमवार को
मोक़्तदा अल-सद्र के समर्थक कहने जा रहे हैं कि अब बहुत हो गया.
संभावना है कि रैली में माँग की जाए कि अमरीका के नेतृत्व वाली फ़ौजों के इराक़ छोड़ने के टाइम टेबल की घोषणा की जाए.
और
यह माँग ऐसे समय में आने वाली है जब वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी कह रहे हैं कि
शिया नेता मोक़्तदा अल-सद्र इराक़ की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं.
उनका आरोप है कि मोक़्तदा अल-सद्र की मेहदी आर्मी के लड़ाके हत्याएँ कर रहे हैं जिससे शिया और सुन्नी के बीच दरार बढ़ती जा रही है.
दो
महीने पहले अमरीकी फ़ौजों ने बग़दाद में सुरक्षा अभियान छेड़ा था और तब से
अब तक मोक़्तदा अल-सद्र को सार्वजनिक रुप से नहीं देखा गया है.
अमरीका
का दावा है कि वे ईरान चले गए हैं लेकिन इसके बावजूद वे इराक़ में एक
महत्वपूर्ण ताक़त हैं और उस समय का इंतज़ार कर रहे हैं जब इराक़ का
नियंत्रण पूरी तरह से इराक़ियों के हाथों में आ जाएगा.
बग़दाद में कर्फ़्यू
उधर सद्दाम हुसैन के सत्ता से हटने के चार बरस पूरा होने को ध्यान में रखते हुए बग़दाद में कर्फ़्यू लगाने की घोषणा की गई है.
सरकारी
टेलीविज़न पर इराक़ी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अधिकारियों को
लग रहा है कि शहर में प्रदर्शन हो सकते हैं और ऐसे में वे नहीं चाहते कि
चरमपंथियों को हमले का कोई अवसर मिले.
इससे पहले रविवार को इराक़ के विभिन्न हिस्सों में हुई हिंसा में 20 से ज़्यादा लोग मारे गए और कई घायल हुए.
सबसे बड़ी घटना दक्षिण बग़दाद के महमूदिया में हुई जहाँ एक शक्तिशाली कार बम फटने से 18 लागों की मौत हो गई.