58 वर्ष की आयु में पोप बनने वाले वह पोलैंड के पहले
नागरिक थे और साथ ही 20वीं शताब्दी में सबसे कम आयु में पोप बनने वाले
व्यक्ति भी.
पादरी वॉयतिला कैथोलिक धर्मगुरुओं की क़तार में बड़ी तेज़ी से ऊपर बढ़े और क्राकोव के आर्चबिशप बने.
वह ऊपर तो बढ़े लेकिन उनका कार्यकाल वैसा शानदार नहीं था.
उनका
सम्मान तो था मगर वैटिकन से बाहर उन्हें लोग कम ही जानते थे और शायद ही
किसी को उम्मीद थी वह पोप जॉन पॉल के उत्तराधिकारी बनेंगे जो केवल 33
दिनों के कार्यकाल के बाद चल बसे थे.
इसके बाद
रोम स्थित सिस्टाइन चैपल के कार्डिनलों ने दो दिन की बैठक के बाद कैरोल
वॉयतिला को नया पोप चुना जिसके बाद उनका नाम पोप जॉन पॉल द्वितीय पड़ा.
जीवन
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 युवा पोप जॉन पोल द्वितीय |
1920
में पोलैंड के शह क्राकोव में जन्मे कैरोल वॉयतिला आरंभ में खेलों में
काफ़ी रुचि लेते थे जिनमें फ़ुटबॉल व स्कीइंग जैसे खेल शामिल थे.
रंगमंच से भी उनका लगाव था और एक समय तो वह अभिनेता बनने को लेकर गंभीर भी थे.
द्वितीय
विश्वयुद्ध के समय जब नाज़ियों ने पोलैंड पर कब्ज़ा किया तो कैरोल को कुछ
समय छिपकर बिताना पड़ा और तब उन्होंने धर्मशास्त्र की पढ़ाई की.
1946 में वे पादरी बन गए और फिर उनकी प्रोन्नति होती गई. वह 1964 में आर्चबिशप बने और 1967 में कार्डिनल.
यात्राएँ
कैथोलिक ईसाई संप्रदाय के धर्मगुरू बनने के बाद पोप कभी भी वेटिकन की चारदीवारी के बीच नहीं घिरे रहे और ख़ूब यात्राएँ कीं.
उन्होंने 100 से भी अधिक देशों की यात्राएँ की हैं और अनुमान ये लगाया जाता है कि वह पृथ्वी के 27 चक्कर काट चुके हैं.
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 1981 में गोली लगने के बाद घायल पोप |
लेकिन लोगों से मेल-जोल रखने की उनकी इस इच्छा ने एक बार उनको मौत के मुँह के पास धकेल दिया था.
1981
में तुर्की के एक कट्टरपंथी मुस्लिम महमत अली अगका ने वेटिकन में सेंट
पीटर्स गिरजाघर के पास पोप को गोली मार दी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो
गए.
लंबे समय के बाद वे ठीक हुए और उन्होंने अली को माफ़ कर दिया.
परंपरावादी विचार
पोप वैसे तो प्रगतिशील विचार रखते हैं मगर तलाक़, परिवार-नियोजन और गर्भपात जैसे मुद्दों पर उनकी राय बिल्कुल परंपरावादी है.
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 कई विवादास्पद मुद्दों पर पोप के विचार बिल्कुल परंपरावादी हैं |
2001
में वेटिकन में एक सम्मेलन में उन्होंने खुलकर तलाक़, गर्भपात, समलैंगिकता
और अविवाहित जोड़ों के लिए अधिकार की व्यवस्था वाले क़ानूनों की आलोचना की.
पोप
के आलोचकों का मानना है कि उनके इन विचारों के कारण कई कैथोलिक मतावलंबी
अपने-आपको अलग-थलग महसूस करते हैं और बदलती दुनिया से भी उनका नाता टूटा
हुआ है.
ख़राब सेहत
पिछले कुछ अर्से से पोप की सेहत ख़राब रही है और वह लगातार बीमार होते रहे हैं.
1992
में पोप के पेट से एक ट्यूमर निकाला गया, 1993 में उनका कंधा खिसक गया था,
1994 में जाँघ की हड्डी टूटी और 1996 में एपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ.
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 पिछले कुछ वर्षों से पोप लगातार बीमार पड़ते रहे हैं |
2001 में ये घोषणा की गई कि पोप को पार्किंसन्स नाम की बीमारी हो गई है.
2003 के अक्तूबर में जॉन पॉल के पोप बनने की रजत जयंती के समय रोम के सेंट पीटर्स स्क्वायर में पूरी दुनिया से ईसाई धर्मावलंबी जुटे.
इसके
पाँच महीने बाद 14 मार्च 2004 को पोप जॉन पॉल द्वितीय कैथोलिक चर्च के
इतिहास में इतने लंबे समय तक धर्मगुरू बनने वाले तीसरे पोप बन गए.
2004
के मई में पोप ने अपनी 84वीं वर्षगाँठ मनाई मगर ख़राब सेहत के बावजूद
उन्होंने आम लोगों को दर्शन देना और विदेशी दौरे करना नहीं बंद किया.
पोप सितंबर 2003 के बाद से हाल-हाल तक हर बुधवार को आम लोगों के सामने आते रहे हैं लेकिन अभी ख़राब सेहत के कारण इसे रोक दिया