बैंक ने अल्प अवधि ऋण दर यानी रेपो
रेट में 0.25 फ़ीसदी की वृद्धि कर इसे 7.75 प्रतिशत कर दिया है जो पिछले
साढे चार साल में सबसे अधिक है. बैंक का कहना है कि पिछले दिनों में बढ़ी
मँहगाई को रोकने के लिए ये कदम उठाया गया है.
इसके
अलावा बैंक ने विभिन्न कमर्शियल बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वो अपने
यहाँ और अधिक नगद राशि रखें. इस सीमा को छह प्रतिशत से बढ़ाकर साढ़े छह
प्रतिशत कर दिया गया है.
पिछले
कुछ महीनों में मँहगाई तेज़ी से बढ़ी है और इस समय मुद्रास्फीति की दर
6.46 प्रतिशत है जो कि रिजर्व बैंक के लिए मुश्किल का सबब हो सकता है.
पिछले तीन वर्षों में रिजर्व बैंक ने सातवीं बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की है जबकि इस साल यह दूसरी बढ़ोतरी है.
जनवरी
महीने में भी रेपो रेट में बढ़ोतरी की गई थी. रेपो रेट वह दर है जिस पर
रिजर्व बैंक विभिन्न बैंकों को अल्प अवधि के लिए रिण मुहैया कराती है.
इन दोनों फ़ैसलों का अर्थ ये हुआ कि अब बैंकों को अधिक दर पर रिण मिलेगा और बैंकों को और अधिक नगद अपने पास रखना होगा.
जानकार
कहते हैं कि इससे मँहगाई में कमी आ सकती है लेकिन बैंक अपने रिण दरों में
बढ़ोतरी कर सकते हैं यानी कार, घर इत्यादि के लोन की दरें फिर एक बार बढ़
सकती है.
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि
मँहगाई बढ़ना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं है और कुछ समय के लिए
आर्थिक विकास की दर धीमी करने की ज़रुरत है.
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक के इस फैसले से विकास की दर थोड़ी धीमी होगी.