मौत से पूर्व संभवतः अपने आख़िरी इंटरव्यू में वूल्मर ने आयरलैंड से पाकिस्तान की हार पर काफ़ी निराशा जाहिर की थी.
पेश है वूल्मर का वह इंटरव्यू जो बीबीसी की खेल संवाददाता ऐलिसन मिशेल ने इस मैच के बाद किया था.
आयरलैंड से हार पर आपका क्या कहना है?
वास्तव में, हमने बहुत ही खराब बल्लेबाजी की और गलतियाँ पर गलतियाँ करते रहे. और कुल मिलाकर ऐसा हुआ कि चालीस से पचास रन कम बने.
लेकिन
मुझे कहना पड़ता है कि हमने कुछ बहुत ही गलत शॉट खेले. मोहम्मद यूसूफ़,
कामरान अकमल, और अज़हर महमूद जिनसे मुझे ज़्यादा उम्मीद थी वे कुछ ऐसे
शॉट्स खेल रहे थे जिसकी उस समय ज़रूरत नहीं थी.
यह बहुत ही दुःख की बात है क्योंकि ढाई-तीन साल की मेहनत का नतीजा यह रहा और इस तरह से बाहर होना बहुत ही निराशाजनक है.
इस हार के बाद व्यक्तिगत रूप से आप कैसा महसूस कर रहे हैं?
क्रिकेट
में कई बुरे दौर मैंने देखे हैं लेकिन पाकिस्तानी टीम के चाहने वालों के
बारे में सोचकर मैं बहुत ज़्यादा निराश हूँ जो हमसे अच्छा करने की उम्मीद
लिए बेताब थे.
पता नहीं टीम के प्रदर्शन को लेकर
माफ़ी मांगने के अलावे मैं क्या कहूँ. क्योंकि साफ तौर पर कहूँ तो हमें
अगले दौर में पहुँचना चाहिए था और मैं समझता हूँ कि यदि हम अगले दौर में
पहुँच पाते तो हमारे लिए और भी आगे तक जाने के काफी बढ़िया आसार थे.
लेकिन दबाव अपना काम कर गई और हम अगले दौर में नहीं पहुँचने जा रहे हैं.
पिछले
वर्ल्ड कप के बाद पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड ने काफी जाँच-पड़ताल की थी और
बड़े पैमाने पर कर्मचारियों में फेरबदल की गई थी. आप अपना भविष्य किस तरह
से देखते हैं?
वैसे भी मेरा अनुबंध 30 जून को समाप्त हो रहा है, इसलिए मैं अपने भविष्य के बारे में कुछ नहीं कहना चाहूँगा.
मैं
कह चुका हूँ कि केवल यात्रा करने से परहेज के चलते मैं अंतर्राष्ट्रीय
क्रिकेट में और आगे नहीं बने रहना चाहता. लेकिन मैं एक अलग स्तर पर कोचिंग
करता रहूँगा. हाँ, मैं समझता हूँ कि मेरे बारे में निर्णय लिया जा चुका है.
इसका मतलब यह कि अनुबंध समाप्त होने से पहले ही आपको जाना पड़ सकता है?
नहीं,
मैं पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से बात करूँगा और देखिए कि वे मुझसे क्या
करवाना चाहते है. यदि वे चाहते हैं कि मैं जाऊँ तो मैं चला जाऊँगा. यदि वे
मुझे बनाए रखना चाहते हैं तो मैं 30 जून तक बना रहूँगा.
लेकिन
मेरे साथ उनका एक अनुबंध है और मैं वह अनुबंध तोड़ने नहीं जा रहा. हाँ,
यदि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड मुझसे छुटकारा पाना चाहते हैं तो यह उनका काम
है.
जहाँ तक मेरी बात है तो मैं क्या करूँगा और
भविष्य में क्रिकेट के क्षेत्र में मैं क्या करने जा रहा हूँ इन सब सवालों
पर मैं अभी कुछ नहीं कहना चाहता.
मैं नहीं समझता कि केवल इस मैच में हार जाने की वज़ह से बतौर एक क्रिकेट कोच मुझमें कोई तब्दीली आ गई है.
जैसा
कि आप भली-भाँति जानते हैं कि पिछले छह महीने में ऐसी कई अप्रिय
परिस्थितियाँ आई हैं जिससे किसी और टीम की अपेक्षा पाकिस्तानी टीम को
प्रशिक्षण देना थोड़ा अलग तरह का काम हो गया है. तो ये सब कुछ चीजें हैं
जिन पर मुझे भी विचार करना पड़ेगा.
यदि मुझे पाकिस्तानी टीम के साथ बरकरार रखना है तो ऐसी बहुत सी चीजों में बदलाव लाना पड़ेगा. ऐसी बहुत सी चीजों में.
लेकिन
वास्तव में इस समय यह पाकिस्तान टीम के लिए बहुत ही दुखद दिन है. मैं भी
इसका एक हिस्सा हूँ और मुझे भी बहुत अच्छा नहीं लग रहा. लेकिन कल फिर से
हमें अपने आप को एक तरह से बटोर कर आगे बढ़ना है.
यदि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड आपको बनाए रखना चाहती हैं तो क्या इससे आपको दिल लगाकर आगे बढने के लिए बल मिलेगा?
जैसा
कि मैंने कहा कि मैं अभी इस बारे में थोड़ा कम ही बात करना चाहूँगा.
मुझमें भी आत्मसम्मान है. कल फिर हम एक साथ बैठेंगे और देखेंगे कि क्या
कुछ हो रहा है.
मैं कोशिश करता हूँ कि निराशाजनक
दिनों पर मैं ज़्यादातर फैसले न ही लूँ. क्योंकि ऐसे फैसले नकारात्मक ही
होते हैं. निराश होने का मतलब है कि आप नकारात्मक हो गए है.
और जब आप अपने भविष्य के बारे में नकारात्मक निर्णय लेते हैं तो मैं नहीं समझता कि यह एक अच्छी बात है.
इसलिए
मैं समझता हूँ कि इस सबके बाद जो कुछ भी हुआ है मैं उस पर अपना ध्यान
केंद्रित करूँगा. मैं पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन से बात करूँगा
और देखूँगा कि वह क्या चाहते हैं.
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जैसा
कि आप भली-भाँति जानते हैं कि पिछले छह महीने में ऐसी कई अप्रिय
परिस्थितियाँ आई हैं जिससे किसी और टीम की अपेक्षा पाकिस्तानी टीम को
प्रशिक्षण देना थोड़ा अलग तरह का काम हो गया है. तो ये सब कुछ चीजें हैं
जिन पर मुझे भी विचार करना पड़ेगा बॉब वूल्मर |
आज
मैं करीब साठ या उनसठ साल का हो गया हूँ और मैं समझता हूँ कि यह समय है जब
मैं अभी भी कोचिंग पर ही ध्यान दूँ क्योंकि मेरे पास क्रिकेट का बहुत
ज़्यादा ज्ञान है और यह ज्ञान मैं दूसरे लोगों तक पहुँचाना चाहता हूँ.
मैं
कुछ सलाहकार किस्म का काम करना चाहूँगा और यह मैं ईंग्लैंड में करना
चाहूँगा. मैं उन सबों की मदद करना चाहूँगा जो मेरे कोचिंग करियर..माफ
कीजिए, अपने क्रिकेट करियर के मामले में मुझसे मदद लेना चाहेंगे.
निश्चित
तौर पर यदि मैं एक कोच की दृष्टि से देखूँ तो मैं नहीं समझता कि विश्व कप
जीतने जैसी कोई उपलब्धि मैं अब हासिल कर सकता हूँ. क्योंकि जब तक अगला
विश्व कप शुरु होगा उस समय तक में तिरसठ साल का हो जाऊँगा और इसके लिए
चूँकि आपको शारीरिक रूप से चलता-फिरता रहना होता है जो आप समझ सकते हैं कि
मेरे लिए कठिन होगा, आसान नहीं होगा.
तो क्या तिरसठ के होते-होते बिल्कुल बैठ जाएँगे?
नहीं नहीं, मैं तो कोचिंग करता रहना चाहता हूँ.
जैसा
कि मैंने कहा, मैं समझता हूँ कि यह समय है जब मैं कोचों को कोचिंग देना
शुरु करूँ, उन लोगों को कोचिंग देना शुरु करूँ जो युवा खिलाड़ियों के साथ
फिर से खेलना चाहते हैं.
ऐसा करने में मुझे मज़ा
आता है. फिर मैं क्रिकेट के बारे में पिछले कुछ दिनों से जो किताब लिखता
रहा हूँ उसे भी लिखना जारी रखना चाहूँगा और कौन जानता है, हो सकता है कि
कल को रेडियो पर कमेंटरी जैसा कुछ कर रहा होऊँ.
और जैसा मैंने कहा कि मैं इस पर अभी चुप ही रहना चाहूँगा. यह मेरे लिए एक निराशाजनक दिन है.
अभी
चुप ही रहने से मतलब यह कि आपने इसको अभी टालने की बजाए लगभग मन बना लिया
है और यह भी कि आप पिछले कुछ समय से इन चीजों पर सोचते रहे हैं?
जी हाँ, मैनें मन बना लिया है लेकिन पहले मुझे इस पर अभी सोचने दीजिए.