कुंबले ने शुक्रवार को बंगलौर में आधिकारिक तौर पर वनडे से संन्यास लेने की घोषणा की.
कुंबले की फिरकी अब सिर्फ़ टेस्ट मैचों में ही देखने को मिलेगी.
टेस्ट
और वनडे में भारत की ओर से सबसे अधिक विकेट चटकाने वाले कुंबले ने माना कि
विश्व कप इतिहास में भारत की इस बार की शुरुआत बेहद खराब रही.
उन्होंने
कहा कि वह युवाओं को मौक़ा देना चाहते हैं. कुंबले ने कहा कि देश में
पीयूष चावला, मुरली कार्तिक जैसे स्पिनर मौज़ूद हैं और प्रतिभाओं की कमी
नहीं है.
कुंबले ने 271 वनडे मैचों में 337 विकेट लिए हैं और उनका औसत रहा 30.9.
17
साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे 36 वर्षीय कुंबले ने इस सफ़र में
साथ देने के लिए टीम के साथियों और कोच का शुक्रिया अदा किया.
उन्होंने अपने माता-पिता, भाई और अपनी पत्नी को भी हर कद़म पर उनका साथ देने के लिए धन्यवाद दिया.
विश्व कप में निराशाजनक विदाई के बाद मीडिया से छिपने के सवाल पर कुंबले ने कहा, "हम मीडिया या लोगों से नहीं भाग रहे हैं."
उनका
कहना था, "मैं अच्छे प्रदर्शन के साथ वनडे को अलविदा कहना चाहता था लेकिन
दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो पाया. उम्मीद है कि टेस्ट क्रिकेट को अपने
अंदाज़ में अलविदा कहूँगा."
कप्तानी मुश्किल
भारतीय
टीम की कप्तानी को मुश्किल बताते हुए उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण
है कि विश्व कप में नाकामी के लिए राहुल द्रविड़ को बलि का बकरा बनाया
गया.
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मैं
अच्छे प्रदर्शन के साथ वनडे को अलविदा कहना चाहता था लेकिन दुर्भाग्य से
ऐसा नहीं हो पाया. उम्मीद है कि टेस्ट क्रिकेट को अपने अंदाज़ में अलविदा
कहूँगा
कुंबले |
उन्होंने कहा कि श्रीलंका के ख़िलाफ़ मैच में हार की वजह बल्लेबाज़ी की विफलता रही.
1990
में अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले कुंबले ने कहा कि चार साल पहले जब
विश्व कप में टीम में होने के बावजूद भी वह एकादश में जगह नहीं बना पा रहे
थे तो उनके मन में वनडे क्रिकेट को अलविदा कहने का विचार आया था, लेकिन
टीम में बने रहने और गेंद थामे रहने की तमन्ना से वह ऐसा नहीं कर सके.
कुंबले
ने वनडे क्रिकेट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हीरो कप के फ़ाइनल में
वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ किया. उन्होंने महज़ 12 रन देकर छह खिलाड़ियों को
पवेलियन की राह दिखाई थी.