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भारत देश
भारत का राष्ट्र फूल
मेरा भारत महान देश है। इस देश बहुभाषीय देश है। इस देश का राष्ट्र फूल कमल है। कमल का रंग गुलाबी होता है। इस देश की राजधानी नई दिल्ली .... Full Story
'गांधी माई फ़ादर' की उलझन'
अनिल कपूर उलझन में हैं. उन्हें अब अपनी फ़िल्म ‘गांधी माई फ़ादर’ (जी हाँ, आख़िर उनकी निर्मित फ़िल्म का यही नाम तय किया गया है) की रिलीज़ फिक्स करनी है.
 मेरा भारत महान देश है। कमल का फूल इस देश का राष्ट्र फूल है। इसका रंग गुलाबी होता है। वैसे तो उन्हें 10 अगस्त की तारीख़ बहुत ठीक लगती है. ख़ासकर इसलिए कि उस हफ़्ते में चार छुट्टियाँ हैं. लेकिन उस छुट्टी वाले सप्ताह में यश चोपड़ा की "चक दे इंडिया" रिलीज़ होने जा रही है. इसलिए अनिल को यह भी पता है कि उस शाहरुख़ ख़ान की फ़िल्म के सामने उनकी फ़िल्म पिट सकती है. गांधी माई फ़ादर एक आम इंटरटेनर तो नहीं है. इसमें अक्षय खन्ना हैं लेकिन चक दे इंडिया में न सिर्फ़ शाहरुख़ हैं पर उसमें मनोरंजन का सारा सामान भी होगा. यह देखकर अनिल कपूर अपनी "गांधी .... Full Story
डी ए ई
सात साल बाद निर्देशक के रूप में फ़िल्म एकलव्य लेकर आए हैं विधु विनोद चोपड़ा. एकलव्य जो कहानी है -एक शाही अंगरक्षक की. कहानी गढ़ी गई है राजस्थान की पृष्ठभूमि में.
अमिताभ बच्चन कहानी के मुख्य पात्र हैं और पूरी फ़िल्म में कहानी उनके ही ईर्द-गिर्द घूमती है. एकलव्य यानी अमिताभ बच्चन देवीगढ़ के शाही परिवार के अंगरक्षक हैं. एकलव्य शाही परिवार की सुरक्षा तो करता ही है लेकिन वो एक रहस्य का भी राज़दार है. ऐसा रहस्य जो राजा (बोमन ईरानी) को तो पता है लेकिन उन्हें भी खटकता है. इसी रहस्य और इससे जुड़े शाही परिवार के ताने-बाने को कहानी में बुनने की कोशिश की है विधु विनोद चोपड़ा ने. लेकिन लेखक अभिजात जोशी और विधु विनोद चोपड़ा इस कहानी के आसपास एक रोचक ड्रामा नहीं रच पाए हैं. कहा जा सकता है कि एकलव्य एक ऐसा ख़ूबसूरत .... Full Story
क्या वापस आएँगी रूप की रानी?
मीडिया में इन दिनों ये चर्चा गर्म है कि अब श्रीदेवी फ़िल्मों में दोबारा काम करने की लिए तैयार हैं. ये बात पिछले हफ़्ते उछली जब श्रीदेवी ने फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार समारोह में एक डांस पेश किया.
लेकिन इतनी जल्दी दर्शक श्रीदेवी को बड़े पर्दे पर नहीं देख पाएँगे. वो इसलिए कि अब तक तो श्रीदेवी ने कोई फ़िल्म साइन भी नहीं की है.उन्हें फ़िल्मों के ऑफ़र तो मिलते हैं लेकिन श्रीदेवी का कहना है कि जब तक रोल में बहुत दम नहीं होगा तब तक वो कैमरे के सामने नहीं आएँगी.सच भी है. जिसने अमिताभ बच्चन के सामने बाग़बाँ में आने से मना कर दिया, जिसने सुभाष घई की यादें और विधु विनोद चोपड़ा की मिशन कश्मीर में काम करने से इनकार कर दिया, वो क्या इतनी आसानी से फ़िल्मों में लौट आएँगी?***********************************************************निशब्द का .... Full Story
नाना पाटेकर का भी भाव बढ़ा
मानो या न मानो पर नाना पाटेकर भी दूसरे सितारों की तरह ही अब पैसा माँगने लगे हैं.
मानो या न मानो पर नाना पाटेकर भी दूसरे सितारों की तरह ही अब पैसा माँगने लगे हैं. आजकल नाना एक फ़िल्म में काम करने के लिए एक करोड़ 70 लाख से दो करोड़ रुपए तक लेते हैं.शायद "हैट्रिक" की कमज़ोर ओपनिंग के बाद नाना को ये रक़म फिर न मिले क्योंकि अगर कोई नायक इतना पैसा लेता है तो कम से कम फ़िल्म की ओपनिंग तो उसके बलबूते अच्छी होनी चाहिए.वैसे हैट्रिक में नाना के अलावा परेश रावल, डैनी डेंज़ोगप्पा, कुणाल कपूर और रिमी सेन भी हैं.चरित्र अभिनेताओं में परेश रावल भी सबसे महंगे हैं. वे एक फ़िल्म के लिए 75 लाख रुपए लेते .... Full Story
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