उन्होंने कहा कि अब तक बांग्लादेश में लोकतंत्र की
वजह से भ्रष्टाचार, मानवाधिकार हनन और अपराधीकरण बढ़ा है जिसने देश के
अस्तित्व के लिए ख़तरा पैदा कर दिया है.
सेनाध्यक्ष
के इस बयान के बाद इस तरह की आशंकाएँ व्यक्त की जाने लगी हैं कि
बांग्लादेश में कहीं सैनिक शासन की योजनाएँ तो नहीं बनाई जा रही हैं.
लेफ़्टिनेंट जनरल ने स्पष्ट नहीं किया कि वे चुनावी लोकतंत्र के बदले कैसी व्यवस्था के पक्षधर हैं.
बांग्लादेश
के सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल मोईन यू अहमद ने कहा, "हम ऐसे चुनावी
लोकतंत्र की दिशा में नहीं जाना चाहते जहाँ भ्रष्टाचार हर जगह हावी हो
जाए, जहाँ राजनीति का अपराधीकरण इस हद तक बढ़ जाए कि देश के अस्तित्व के
लिए ख़तरा पैदा हो जाए."
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हम
ऐसे चुनावी लोकतंत्र की दिशा में नहीं जाना चाहते जहाँ भ्रष्टाचार हर जगह
हावी हो जाए, जहाँ राजनीति का अपराधीकरण इस हद तक बढ़ जाए कि देश के
अस्तित्व के लिए ख़तरा पैदा हो जाए लेफ़्टिनेंट जनरल अहमद |
जनवरी
में देश में आपातकाल लागू होने के बाद से बड़ी संख्या में राजनीतिक नेताओं
के घरों और दफ़्तरों पर छापे मारे गए हैं और 100 से अधिक लोगों को हिरासत
में लिया गया है.
इस समय अंतरिम सरकार बांग्लादेश में शासन चला रही है जिसे सेना का समर्थन हासिल है.
लेफ़्टिनेंट जनरल अहमद ने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता के कारण देश में भ्रष्टाचार बढ़ा जिसने विकास को बिल्कुल ठप कर दिया है.
बांग्लादेश के सेनाध्यक्ष ने कहा, "अगर भ्रष्टाचार इतना हावी नहीं रहता तो बांग्लादेश बहुत तेज़ गति से प्रगति कर सकता था."
बांग्लादेश
में पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार 22 जनवरी को चुनाव होने वाले थे लेकिन
राजनीतिक हिंसा के कारण इसे स्थगित कर दिया गया है.
पिछले
वर्ष अक्तूबर महीने में पूर्व राष्ट्रपति ख़ालिदा ज़िया का कार्यकाल
समाप्त हो गया उसके बाद से देश में राजनीतिक अव्यवस्था का दौर जारी है.
देश
में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान अंतरिम सरकार चला रही है, अंतरिम सरकार के
मुखिया केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष फ़ख़्रउद्दीन अहमद हैं जिन्हें सेना का
पूरा समर्थन हासिल है.